Tardigrade (A New Discovery) : वैज्ञानिकों ने खोज निकाला एक ऐसा जीव, जिसकी मौत है; असंभव!

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टार्डिग्रेड

Tardigrade (A New Discovery) : रहस्यों से भरी इस दुनिया में हम, हजारों-करोड़ों ऐसे जीवों से घिरे हैं, जो प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए निस्वार्थ भाव से इस धरती पर अपना जीवन जी रहे हैं। कुछ से, तो हम परिचित हैं, लेकिन कुछ से नहीं, ऐसे ही एक जीव के बारे में हम आपको बताने वाले हैं, जिसकी खोज हाल ही में भारती अंतरिक्ष और जीव वैज्ञानिकों ने की है। इस जीव की खोज टार्डिग्रेड की एक नई प्रजाति के रूप में हुई है। जिसे आसान भाषा में जलीय भालू भी कहा जाता है।

बता दें कि, ये खोज ऐतिहासिक होने वाली है, क्योंकि शोधकर्ताओं ने इस जीव का नाम, भारत के चंद्रयान मिशन के पूरा होने के सम्मान में रखा गया है। जिसे ‘बैटिलिप्स चंद्रायणी’ नाम दिया गया है। इस नई प्रजाति की खोज… कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के समुद्री प्रौद्योगिकी विभाग के वैज्ञानिक एस. बिजॉय नंदन और विष्णु दत्तन ने की है। उन्होंने तमिलनाडु में मंडपम के समुद्र तट की गहरायों से समुद्री टार्डिग्रेड की इस नई प्रजाति को खोजा है, जो किसी रहस्य से कम नहीं है।

क्या है टार्डिग्रेड ?

टार्डिग्रेड यानी समुद्री भालू बहुत ही सुक्ष्म जीवों में से एक होते हैं, जो ज्यादातर पानी वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं, लेकिन ये एक ऐसा जीव है, जो मिट्टी , कूड़े, पेड़ के पत्तों या फिर उंचे टिलों पर भी पाया जा सकता है। क्योंकि टार्डिग्रेड किसी भी वातावरण में खुद को उसके अनुसार ढाल सकता है। अगर इसके आकार की बात करें, तो लंबाई लगभग 0.15 मिलीमीटर और चौड़ाई 0.04 मिलीमीटर होती है। टार्डिग्रेड के शरीर में एक सिर समेत शरीर के तीन खंड और होते हैं, जिनमें से प्रत्येक में एक जोड़ी पैर होते हैं, यानी आठ पैरों वाले इस जीव के प्रत्येक पैर में चार से आठ पंजे हो सकते हैं।

टार्डिग्रेड को क्यों कहा जाता है जलीय भालू ?

छोटे से दिखने वाले इस टार्डिग्रेड, जिसे जलीय भालू कहा जाता है। लेकिन भालूओं से इसका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। बस इसकी सरचना और धीरे-धीरे चलने की क्रिया के कारण कहा जाने लगा होगा, लेकिन सबसे अहम बात तो ये है कि वैज्ञानिक इसे अंतरिक्ष से क्यों जोड़कर देख रहे हैं?

क्या भविष्य में इसपर को कोई प्रयोग किया जा सकता है या फिर ऐसा हो सकता है कि टार्डिग्रेड को भी किसी ग्रह पर भेजा जा सकता है? क्योंकि अंतरिक्ष बहुत ही घातक है, जहां पर हर किसी का सर्वाइव कर पाना बहुत ही मुश्किल है, लेकिन टार्डिग्रेड के साथ ऐसा नहीं है। यह हमारे सुरक्षात्मक वातावरण के बाहर दूर स्थित सुपरनोवा और सूर्य से निकलने वाली हानिकारक किरणों को भी बेअसर कर सकता है। यही कारण है कि अंतरिक्ष वैज्ञानिक टार्डिग्रेड में इतनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।