Srikanth Review: ‘मैं भाग नहीं सकता, सिर्फ लड़ सकता हूं’, नेत्रहीन के लिए सोच बदलती ‘श्रीकांत’

Published

Srikanth Review: ‘श्रीकांत दृष्टिबाधित उद्योगपति और बोलैंट इंडस्ट्रीज के संस्थापक श्रीकांत बोल्ला के जीवन पर आधारित फिल्म है। इसका निर्देशन तुषार हीरानंदानी ने किया है और इसमें राजकुमार राव, ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर मुख्य भूमिका में हैं।

ये फिल्म उद्यमी श्रीकांत बोल्ला की कहानी बताती है, जिन्होंने बोलैंट इंडस्ट्रीज के संस्थापक के रूप में प्रसिद्धि हासिल की। 2012 में बनाई गई कंपनी एक अभूतपूर्व उद्यम है जो पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बनाने के लिए अकुशल और विकलांग व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्रदान करती है। फिल्म श्रीकांत के संघर्षों का वर्णन करती है, जो 1992 में भारत के तत्कालीन अविभाजित आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के सीतारमपुरम गांव में दृष्टिबाधित पैदा हुए थे।

संघर्ष से सफलता तक

फिल्म में उनके बचपन के संघर्षों को दिखाया गया है. इस फिल्म में एक पंक्ति भी है ‘मैं भाग नहीं सकता, सिर्फ लड़ सकता हूं’, जो सुनने में अच्छी लगती और श्रीकांत के संघर्षों को पारदर्शिता देती है। यह फिल्म श्रीकांत की दृढ़ता और उपलब्धि की एक असाधारण कहानी का उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिसमें 98% अंक प्राप्त करने के बावजूद भी, एक विषय के रूप में विज्ञान का अध्ययन करने के लिए उन्हें अदालत जाना पड़ता है। इतना संघर्ष करने के बावजूद उन्हें IIT में भी एडमिशन नहीं मिल पता है। जिसके बाद वो Massachusetts Institute of Technology में एडमिशन ले लेते है।

पहला हाफ अच्छा, दूसरा हाफ बोरिंग

पहला हाफ अच्छा है और दर्शकों को जुड़े रखता है। लेकिन जैसे ही उनकी प्रेम कहानी शुरू होती है, फिल्म अपने मुद्दे से भटकती नजर आती है और दूसरा हाफ लगभग बोरिंग हो जाता है। हालांकि, फिल्म बीच-बीच में है अपनी और ध्यान आकर्षित करती है, लेकिन इस ध्यान को बांधे रखने में असफल रहती है। प्रेम कहानी काफी लंबी हो जाती है और अगर इस हिस्से की बजाय ज्यादा ध्यान श्रीकांत के संघर्ष को दिखाया जाता तो शयद ये फिल्म अपना चार्म बनाए रखती।

राजकुमार से लेकर शरद और ज्योतिका तक, सभी ने शानदार अभिनय किया है, लेकिन आलया का अभिनय अप्रत्याशित था और इस चरित्र के लिए कोई अन्य लड़की चुनी जा सकती थी। राजकुमार राव भी दूसरे हाफ में दृष्टिहीन होने की बजाय मानसिक रोगी लगते हैं।

कुल मिलाकर, फिल्म अच्छी है और एक बार देखने योग्य है। हम इस फिल्म को केवल राजकुमार, ज्योतिका, शरद और श्रीकांत बोल्ला के लिए 3 स्टार दिए जा सकते हैं।