Uttarkashi Tunnel Rescue: 400 घंटे तक मौत से कैसे लड़ते रहे मजदूर?

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नई दिल्ली/डेस्क: 41 मजदूरों को उत्तराखंड के एक दुर्घटनाग्रस्त सुरंग से 17 दिनों के बाद बचाया गया है। जिनमें से एक झारखण्ड के अनिल बेडिया भी थे, जिन्होंने बताया कि उन्होंने कैसे 400 घंटे तक मौत के साथ लड़ाई की।

बेडिया ने बताया कि जब तक नया 6 इंच का पाइप स्थापित नहीं हुआ, तब तक उन्होंने भुने हुए चावल और मुरमुर खाकर पेट की आग बुझाई और पत्थरों से टपकते पानी को चाटकर प्यास बुझाई।

22 वर्षीय अनिल, जो झारखंड के निवासी हैं, इस सुरंग के निर्माण के दौरान दिवाली के दिन फंस गए थे। जब यमुनोत्री नेशल हाईवे पर निर्माणाधीन इस टनल में अचानक हजारों टन मलबा गिर गया। सुरंग में जोरदार आवाज के साथ जब मलबा गिरा तो अंदर काम कर रहे सभी मजूदर बहुत भयभीत हो गए थे। निकलने का मार्ग बंद हो जाने पर, पहले उन्हें ऐसा लगा कि अब वह सभी इसे सुरंग में ही दफन हो जाएंगे।

बुधवार सुबह, अपने परिवार से फोन पर बातचीत करते हुए, अनिल ने अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा, ‘हम सभी ने सोचा कि अब हम सुरंग में ही दफन हो जाएंगे। हम सभी ने पहले ही कुछ दिनों में उम्मीद खो दी थी।’

उन दृश्यों को याद करते हुए, अनिल ने कहा, ‘यह एक बहुत डरावनी स्थिति थी… हमने पत्थरों पर टपकते पानी को चाटकर अपनी प्यास बुझाई और 10 दिनों तक मुरमुर खाकर जीवित रहे।’ तुन्नल में फंसे 41 मजदूरों में से अधिकांश 15 झारखंड से थे। इसलिए इस मिशन की सफलता पर झारखंड में सभी खुशी से झूम उठे।

लेखक: करन शर्मा